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Unnao Case: 'न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ूंगी...' सेंगर की बेटी का मार्मिक खत

पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण की पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें शीर्ष अदालत पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें झूठा साबित करने की कोशिश कर रहे थे, उन पर सख्त कार्रवाई जरूर होगी। पीड़िता ने दो टूक कहा कि वह न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ती रहेंगी।

पीड़िता ने फोन पर बातचीत में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि देश की हर पीड़ित महिला की आवाज है। अगर सेंगर को जमानत मिलती है, तो ऐसे हजारों मामलों में इसे नजीर बनाकर अपराधी सलाखों से बाहर आ जाएंगे, जो बहन-बेटियों पर अत्याचार करने वालों के हौसले बढ़ाएगा।

उन्होंने कहा कि अगर हाईकोर्ट के फैसले के तुरंत बाद सीबीआई ने अपील दायर कर दी होती, तो उन्हें और उनकी मां को इतने संघर्ष और पुलिस की धक्कामुक्की का सामना नहीं करना पड़ता। पीड़िता ने याद दिलाया कि तीस हजारी कोर्ट ने दुष्कर्म और उनके पिता की मौत के मामले में कुलदीप सेंगर को आखिरी सांस तक जेल की सजा सुनाई थी। उन्होंने कहा कि सेंगर चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, वह न्याय की लड़ाई कभी नहीं छोड़ेंगी।

पीड़िता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी स्वतः संज्ञान लेकर उन्हें न्याय दिलाया था। जुलाई 2019 में रायबरेली में हुई कार दुर्घटना, जिसमें उनकी चाची और मौसी की मौत हो गई थी, उस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर केस को दिल्ली ट्रांसफर किया था।

पीड़िता ने सरकार से सीआरपीएफ सुरक्षा बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें, उनके परिवार और पैरोकारों को सीआरपीएफ सुरक्षा दी गई थी, लेकिन करीब छह साल बाद तीन अप्रैल 2025 को उनके अलावा अन्य सभी की सुरक्षा वापस ले ली गई। सेंगर समर्थकों से परिवार और मददगारों को जान का खतरा है, इसलिए सुरक्षा बहाल की जानी चाहिए।

वहीं, सजा निलंबित होने के बाद पूर्व विधायक के जेल से बाहर आने की उम्मीद लगाए समर्थकों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से मायूसी है। समर्थकों का कहना है कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 53 पन्नों का फैसला तथ्यों के आधार पर दिया है और सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई के दौरान सच्चाई सामने आएगी।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद कुलदीप सेंगर की बेटी इशिता सेंगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भारत गणराज्य के माननीय अधिकारियों को पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि वह एक ऐसी बेटी हैं जो थकी हुई, डरी हुई और धीरे-धीरे भरोसा खो रही है, लेकिन अब भी उम्मीद से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों से उनका परिवार चुपचाप न्याय का इंतजार करता रहा, कानून और संविधान पर भरोसा किया।

इशिता ने लिखा कि सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार नफरत और धमकियों का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें भीतर से तोड़ दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संस्थाओं पर भरोसा कर चुप रहने की उन्हें कीमत चुकानी पड़ रही है।

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