खस्ताहाल सड़क, ओवरलोड राख परिवहन से पैदा प्रदूषण सहित गांव की अन्य समस्याओं पर कोटा के ग्रामीण एवं स्कूली बच्चे सोमवार की सुबह सड़क पर उतर गए। ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर पदयात्रा किया और पावर प्रोजेक्ट के गेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान विनाश की कीमत पर विकास नहीं का नारा लगाया गया। मध्य प्रदेश बार्डर से कोटा होते हुए खड़िया बाजार व कोटा से पीडब्ल्यूडी मोड़ तक की सड़क पावर प्रोजेक्ट से उत्सर्जित राख के ओवरलोड परिवहन से पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। खस्ताहाल सड़क से गुजरने वाले ओवरलोड ट्रक-ट्रेलरों से प्रदूषण बढ़ गया है। इस अव्यवस्था से हर तबके के लोग प्रभावित हैं। स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। क्षतिग्रस्त सड़क पर बड़े वाहनों के दौड़ने से बच्चों सहित सभी राहगीरों का जीवन खतरे में पड़ गया। इस मसले पर ग्रामीणों ने पत्र के माध्यम से पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन को कई बार आगाह किया, लेकिन गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसी से नाराज ग्रामीण सड़क पर उतर गए। कोटा स्थित अयप्पा मंदिर से हाथों में तख्तियां लेकर ग्रामीण व बच्चों ने पदयात्रा शुरू कर दिया। पावर प्रोजेक्ट के कोटा गेट पर पहुंच ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया और अव्यवस्था के लिए पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन को जिम्मेदार बताते हुए नारेबाजी की। काफी संख्या में ग्रामीणों के गेट पर पहुंचने व प्रदर्शन की सूचना से अधिकारियों में खलबली मच गई। इसके बाद प्रबंधन के अधिकारी नरेश कुमार ग्रामीणों के बीच पहुंचे और बात किया। इस दौरान आशीष चौबे ने ग्रामीणों की समस्या को अधिकारी के समक्ष रखा और समाधान की मांग की। इस पर नरेश कुमार ने हर संभव सहयोग के आश्वासन के साथ सड़क मरम्मत, पानी का छिड़काव, खेल मैदान सहित अन्य मुद्दों पर सकारात्मक रूख दिखाया। अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद ग्रामीण वापस लौट गए।