घोरावल नगर में स्थित थाने के पुराने भवन पर कब्जे का विवाद बढ़ता जा रहा है। वर्ष 1856 में निर्मित प्राचीन थाना भवन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए सोमवार को नगरवासियों व व्यापार मंडल पदाधिकारियों ने प्रेस से वार्ता की। उन्होंने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन भी सौंपा। पूर्व चेयरमैन राजेश कुमार व राकेश उमर ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि ऐतिहासिक महत्व का यह भवन जर्जर अवस्था है। इसके बावजूद बाहरी अराजक तत्व जबरन जेसीबी चलाकर इसकी दीवारें और संरचनाएं गिरा रहे हैं। परिसर पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। आरोप लगाया कि थाना भवन को जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया जा रहा है, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान मिटने का खतरा उत्पन्न हो गया है। कांग्रेस जिला महासचिव एवं प्रवक्ता इनामुल हक अंसारी ने बताया कि थाना भवन जिस भूमि पर स्थित है, वह आबादी की भूमि है। ऐसे में उस पर किसी भी प्रकार का कब्जा गैरकानूनी है। इससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंच सकती है। व्यापार मंडल घोरावल के अध्यक्ष दयाशंकर रौनियार ने बताया कि मामले की शिकायत डीएम के साथ मुख्यमंत्री से भी की गई है। ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने एसडीएम, सीओ और ईओ की संयुक्त समिति गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं। समिति की रिपोर्ट आने तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगा दी गई है। मांग की कि ऐतिहासिक थाना भवन को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित किया जाए। इस दौरान अमरेश चंद्र, राजेंद्र कुमार मानव, सभासद दीपक उमर, कृष्ण कुमार भी मौजूद रहे।