बिजली निगम कर्मचारियों की कमी का दंश झेल रहा है। निगम उपभोक्ताओं को अबाध सेवा देने के लिए निजी लोगों को लगाकर उनसे लाइन मैन का काम लेता है। यही लोग जब किसी घटना का शिकार होते हैं तो निगम अपना कर्मचारी न होने की बात कह पल्ला झाड़ लेता है। ऐसा ही कुछ गिलौला के सिसवारा में भी देखने को मिला। गिलौला के सिसवारा चौराहे पर रबिवार को एकमुस्त समाधान योजना के तहत कैंप लगा कर वसूली की जा रही थी। जहां लाइन मैन के संरक्षण मे कार्य कर रहे निजी लाइन मैन मातबर यादव को पोल पर चढक़र लाइन काटने को कहा गया था। जैसे ही वह पोल पर चढ़ा तभी अचानक बिजली की चपेट मे आकर झुलस गया। जिसका इलाज ट्रामा सेंटर लखनऊ में चल रहा है। घटना के बाद निगम के जिम्मेदारों ने कर्मचारी न होने की बात कह अपना पल्ला झाड़ लिया। जबकि मौजूद लोगों का कहना था कि मौके पर अवर अभियंता सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद थे। गिलौला क्षेत्र की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी विद्युत उपकेंद्र गिलौला में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते कई निजी कर्मी बिजली की चपेट मे आ चुके है। इनमें से कुछ की मौत हुई तो कुछ अपंगता का शिकार हो गए। केस एक : क्षेत्र के माजरे गांव निवासी मोहम्मद इस्लाम आठ मई 2018 को एकघरवा गांव में लगे राजकीय नलकूप पर रखे ट्रांसफार्मर का जंपर काटने के लिए शटडाउन लेकर पोल पर चढ़े थे। इस बीच कर्मचारियों द्वारा आपूर्ति बहाल कर दिए जाने से वह गंभीर रूप से झुलस गए। जिनका दोनों हाथ खराब हो गया। उनकी देखभाल बूढ़ी मां कर रही है। जिसने जमीन बेचकर इलाज कराया। लेकिन फायदा नहीं मिला। केस दो: तिलकपुर गांव निवासी सुखदेव आर्य 10 मई 2015 को तिलकपुर मोड़ पर लगे डबल पोल पर रखे ट्रांसफार्मर का शटडाउन लेकर जंपर काटने चढ़े थे। अचानक आपूर्ति बहाल कर दिए जाने के कारण वह झुलस गए। जिन्हें जिला चिकित्सालय बहराइच ले जाया गया। जहां चिकित्सक ने उनका एक पैर काट दिया। उन्हें अपने इलाज में जमीन बेच कर करीब पांच लाख रुपये खर्च करने पड़े थे। केस तीन: तिलकपुर निवासी आशीष यादव उपकेंद्र में बिजली कार्य करता था। करीब एक बर्ष पूर्व लालपुर लहूरातारा गांव मे पोल पर चढक़र लाइन बनाते समय करंट की चपेट मे आकर पोल से गिरा जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई । केस चार: क्षेत्र के कुरबेनी गांव निवासी गोबरे महराज बिद्युत उपकेंद्र गिलौला में संबिदा पर तैनात लाइन मैन के संरक्षण मे कार्य करता था। करीब एक माह पूर्व धरसवा गांव मे शटडाउन लेकर पोल पर चढक़र लाइन बना रहा था। इसी बीच बिजली की चपेट में आने से वह झुलस गया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मामले में परिजनों ने गिलौला थाने मामला दर्ज कराया था। केस पांच: गिलौला खुटेहना मार्ग पर सदाशिव मंदिर के पास करीब एक वर्ष पूर्व भोंदू ट्रांसफार्मर का तार जोड़ते समय बिजली की चपेट में आ गया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना में भी विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया था। श्रम विभाग में पंजीयन जरूरी सहायक श्रमायुक्त संतपाल का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति निजी क्षेत्र या किसी निजी व्यक्ति के संरक्षण में कार्य करता है तो उसे श्रमिक के रूप में श्रम विभाग में पंजीयन कराना चाहिए। ताकि दुर्घटना होने पर उसे योजनाओं से लाभान्वित कराया जा सके। दुर्घटना में मौत होने पर श्रमिक के आश्रितों को पांच लाख रुपये, दिव्यांग होने पर एक लाख व सामान्य मौत पर सवा दो लाख रुपये दिए जाते हैं। यदि वह यह साबित कर दे कि वह किसके संरक्षण में काम करते समय दुर्घटना का शिकार हुआ या मौत हुई। तो ऐसे लोगों को उपरोक्त लाभ के साथ ही 15 लाख रुपये तक का मुआवजा भी दिया जाता है। अधिशाषी अभियंता विद्युत राज नारायण का कहना है कि ऐसी प्राइवेट लोगों से काम लेने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई ऐसा करता है तो वह गलत करता है। ऐसे लोगों के दुर्घटना के शिकार होने पर विभाग की ओर से कोई लाभ देने का प्रावधान नहीं है। जो लेकर गया था। वहीं व्यक्तिगत जिम्मेदार होगा।