बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती स्थित दिगंबर जैन मंदिर में भगवान संभवनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव का शुक्रवार देर रात समापन हुआ। इस मौके पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। जन्म कल्याणक महोत्सव में देर शाम श्री1008 भगवान संभवनाथ के जन्म पर उनके प्रतिरूप में बालक को मौजूद लोगों ने झूला झुलाया। इस मौके पर जैन समुदाय की महिलाओं ने मंगल गीत भी गाते हुए भांगड़ा नृत्य भी किया। कार्यक्रम के दौरान बिधानाचार्य संजीव कुमार जैन ने विधि विधान से पूजन करके जन्म कल्याण महोत्सव का समापन किया। विधानाचार्य ने बताया कि भगवान संभवनाथ का श्रावस्ती में जन्म हुआ था। इसलिए हमारे जैन धर्म में इसका बहुत ही महत्व है। वह स्थल आज भी विद्यमान है। जिस स्थल पर भगवान संभवनाथ का जन्म हुआ था। इसलिए हम सभी जैन अनुयाई मंदिर परिसर से भगवान को हाथ में लेकर रथ सजा कर लंका मंदिर होते हुए संभवनाथ स्तूप तक आते हैं। यहां पर भगवान का जन्म उत्सव का क्रियाकलाप पूर्ण करते हैं। इस मौके पर जय जिनेंद्र के उद्घोष से समूचा परिसर गुंजायमान रहा। कार्यक्रम के दौरान महेंद्र कुमार जैन, सुरेंद्र कुमार जैन, प्रकाश चंद्र जैन, पिंटू जैन, मनीषा जैन, रूपा जैन सहित देश के अलग अलग क्षेत्रों से आए जैन परिवार के लोग मौजूद रहे।