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VIDEO : अनुयायियों से गुलजार हुई बुद्ध की तपोस्थली... आनंद बोधि पर की प्रार्थना

महात्मा बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को अनुयायियों से गुलजार रही। श्रीलंका से आए 120 सदस्यीय दल के सदस्यों ने भिक्षु दीपालाक महाथेरो के नेतृत्व में आनंद बोधि पर प्रार्थना की। इसके बाद अनुयायियों ने तथागत भगवान बुद्ध की प्रतिमा लेकर तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण किया। बुद्ध की तपोस्थली मंगलवार को 'बुद्धम् शरणम् गच्छामि, संघम् शरणम् गच्छामि... धम्मम् शरणम् गच्छामि' के मंत्र से गुंजायमान रही। बौद्ध सभा के दौरान भिक्षु दीपालाक महाथेरो ने कहा कि सांसारिक दुखों से मुक्ति के लिए बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग की बात कही है। बौद्ध धर्म का परम लक्ष्य निर्वाण है। इसका अर्थ है दीपक का बुझ जाना। अर्थात जीवन मरण चक्र से मुक्त हो जाना। कहा कि बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति को सरल बनाने के लिए 10 शीलों पर बल दिया है। वह शील हैं अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, मद्य सेवन ना करना, असमय भोजन ना करना, सुखप्रद बिस्तर पर नहीं सोना, धन संचय ना करना सहित अन्य हैं। बुद्ध ने मध्यम मार्ग का उपदेश दिया। अनीश्वरवाद के संबंध में बौद्ध धर्म व जैन धर्म में समानता है। सर्वाधिक बुद्ध मूर्तियों का निर्माण गांधार शैली के अंतर्गत किया गया। लेकिन बुद्ध की प्रथम मूर्ति संभवता मथुरा कला के अंतर्गत बनी थी। पूजन के उपरांत सभी उपसको ने कौशांबी कुटी, सभामंडप, सूर्य कुंड, संघाराम विहार, अंगुलिमाल स्तूप, पूर्वा राम विहार का भ्रमण किया। इस मौके पर काफी संख्या में उपासक मौजूद रहे।

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