शाहजहांपुर के गांव उदरा टिकरी निवासी विनोद कुमार अपनी 35 वर्षीय पत्नी दीपमाला के साथ और गांव के रामकुमार यादव व उनकी पत्नी सविता बस से हाथरस गए थे। उनके साथ बस में बंडा, देवकली, कमालपुर गांव के 49 लोग और भी थे। सभी लोग रविवार को सत्संग में पहुंच गए थे। मंगलवार को रामकुमार व विनोद पहरेदार बनकर सेवा कर रहे थे। उनकी ड्यूटी मैदान से बाहर लगी हुई थी। वहीं दीपमाला व सविता देवी पंडाल में बैठकर मैदान में सत्संग सुन रही थीं। सत्संग खत्म होने के बाद भोलेबाबा के पैर छूने को लेकर भगदड़ मच गई। इसमें दीपमाला व सविता घायल हो गईं थीं। दोनों घायल महिलाओं को हाथरस के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। दीपमाला की इलाज के दौरान मौत हो गई। विनोद कुमार ने बताया कि वह 15 वर्षों से संगत से जुड़े थे। उनकी पत्नी पहले काफी बीमार रहती थी। सत्संग में जाने के बाद जब वह ठीक हो गई तो वे लोग इसे संगत का चमत्कार मानने लगे। इसके बाद हर संगत में शामिल होते थे। उन्होंने कहा कि वे लोग तो मंगल कामना के साथ संगत में गए थे, क्या पता था कि ऐसा कुछ हो जाएगा।