बच्चों को कम उम्र में खेलने के लिए थमाया गया मोबाइल अब उनके अभिभावकों के लिए मुसीबत बन गया है। बच्चों की समय से बोलने की क्षमता पर असर पड़ रहा है। जिला अस्पताल में स्पीच थेरेपी न होने से अभिभावक परेशान हैं। हर सप्ताह इस तरह के दो से तीन मरीज आ रहे। समय के साथ घर-परिवार का माहौल अब बदल चुका है। पहले छोटे बच्चों को खेलने के लिए परिजन बाजार से तरह-तरह खिलौने दिया करते थे, लेकिन अब अभिभावक खिलौनों के स्थान पर उनके हाथ में मोबाइल थमाते हैं। इससे इससे बच्चों के लिए यह मोबाइल आदत में शुमार हो गया है। इसका असर उनके विकास पर भी देखा जा रहा है। सबसे अधिक समस्या बच्चों को बोलने की क्षमता में आ रही है।