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Video: रायबरेली में आजादी के बाद निहस्था गांव बना था बॉलीबॉल के खिलाड़ियों की नर्सरी

रायबरेली जिले का खीरों ब्लॉक वॉलीबॉल के खेल में एक अनूठी पहचान रखता है। देश की आजादी के बाद, वर्ष 1948 में इसी क्षेत्र के निहस्था गांव में वॉलीबॉल की शुरुआत हुई, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। निहस्था गांव आज भी वॉलीबॉल का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जिसकी गवाही यहां की व्यायामशालाएं देती हैं, जहाँ कभी खिलाड़ी इस खेल में निपुणता हासिल करते थे। प्रतिष्ठित खिलाड़ियों की भूमि खीरों ब्लॉक ने कई ऐसे खिलाड़ियों को जन्म दिया है जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इनमें गजेंद्र सिंह का नाम प्रमुख है, जिन्होंने टाटा स्टील के लिए खेला। विवेक सिंह ने तेहरान में यूथ इंडिया टीम का प्रतिनिधित्व किया, जबकि उपेंद्र सिंह ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी की कप्तानी की। यतेंद्र सिंह ने राजस्थान में कोच के रूप में अपनी सेवाएं दीं, और केबी सिंह ने सेना की ओर से खेलते हुए क्षेत्र का मान बढ़ाया। इन खिलाड़ियों ने निहस्था को 'वॉलीबॉल की नर्सरी' के रूप में स्थापित किया है। मिनी स्टेडियम का बदहाल सच निहस्था की वॉलीबॉल विरासत को देखते हुए, इस क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से एक मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना था। हालांकि, दुर्भाग्यवश, स्टेडियम की देखरेख के अभाव में यह बदहाल हो गया है। इससे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं पर प्रश्नचिह्न लग गया है। पहचान की मशाल जलाए हुए मिनी स्टेडियम की दुर्दशा के बावजूद, निहस्था और खीरों ब्लॉक की पहचान आज भी देश भर में वॉलीबॉल के खिलाड़ियों के गढ़ के रूप में बनी हुई है। यह क्षेत्र खेल के प्रति अपने समर्पण और खिलाड़ियों की प्रतिभा के लिए जाना जाता है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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