मौसम का मिजाज बदला हुआ है और बारिश की अभी दो तीन दिन संभावना नहीं है। ऐसे में बीमारियों का घेरा बढ़ता जा रहा है। सोमवार को अवकाश के तीन दिन बाद जिला अस्पताल खुला तो पर्चा काउंटर के बाहर लंबी लाइन लगी दिखी। हाल यह रहा कि जहां पर सीएचसी हैं, वहां दवा न मिलने से मरीजों को जिला अस्पताल आना पड़ा। इसके साथ ही बाहर की दवा लिखने के मामले भी सामने आए, मरीजों ने बताया कि बाहर की दवा लिखी जा रही है। जिला अस्पताल में बाहर की दवा न लिखी जाए, इस पर शासन प्रशासन के सख्त निर्देश हैं लेकिन उसके बाद भी जिला अस्पताल में बाहर की दवा लिखी जा रही है। एक मरीज ने बताया कि उन्हें चलने फिरने में दिक्कत होती है। चिकित्सक को दिखाया तो बाहर की दवा का पर्चा थमा दिया। वहीं जिला अस्पताल के पर्चे में जो दवा लिखी गई थी, उसमें केवल एक दवा दी गई। मरीज ने बताया कि पिछले काफी समय से वह इलाज करा रहे हैं और एक दवा दे दी जाती है और बाकी की दवा बाहर से खरीदनी पड़ती है। पैसा न होने की वजह से वह बाहर की दवा नहीं खरीद पा रहे हैं। इसी तरह महिला मरीज ने बताया कि उनके दो पर्चे बने हैं और दवा नहीं दी जा रही है। दवा मांगने पर उनको फटकारा जाता है। जिला अस्पताल में बाहर की दवा लिखने का जो सिंडीकेट है वह बराबर चल रहा है। इससे मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।