रायबरेली जिले में इस साल कुत्तों ने अब तक सबसे अधिक लोगों को जख्म दिया है। रोजाना से 20 से 30 नए लोग एंटी रेबीज वेनम (एआरवी) लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। बीते छह माह में 23394 लोग कुत्तों के काटे जाने से जख्मी हो चुके हैं। इसमें 18915 लोगों को जंगली कुत्तों ने काटा है, जबकि 4474 लोग पालतू कुत्तों के चपेट में आए। जिले में यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अब बिल्ली के काटने के केस भी जिला अस्पताल में बढ़े हैं। पिछले कई साल से कुत्तों का आक्रमण तेजी से बढ़ा है, लेकिन इस साल जनवरी माह से ही केस तेजी से बढ़े रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा लोग आवारा कुत्तों के चपेट में आ रहे हैं। जिले में हर जगह पर सडक़ किनारे कुत्ते लोगों को काटकर घायल कर रहे हैं। शासन स्तर ने भी कुत्तों के काटने की संख्या बढ़ने के कारण एआरवी के भी पर्याप्त बंदोबस्त किए हैं। जिला अस्पताल के साथ ही सभी सीएचसी में एआरवी की व्यवस्था कराई गई है। सीएचसी के अलावा जिला अस्पताल में कुत्तों के काटने के रोजाना 20 से 30 नए मरीज एआरवी लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। बीते छह माह में जिले के अस्पतालों में 23394 लोग एआरवी लगवाने के लिए सरकारी अस्पतालों में पहुंच चुके हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। 72 घंटे के भीतर एआरवी का पहला टीका जरूर लगवाएं जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को रेबीज संक्रमित किसी जानवर ने काट लिया और उसने 72 घंटे के भीतर अपना इलाज नहीं करवाया तो उसके बाद वैक्सीन या एआरवी का टीका लगवाने का कोई फायदा नहीं है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि कुत्ते के काटने के 72 घंटे के अंदर एआरवी का पहला टीका जरूर लगवाया जाए। कुत्ता काटने वाले स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डिटॉल से साफ करें। उसके तुरंत बाद टीक लगवाएं। रैबीज के संक्रमण के लक्षण जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना ने बताया कि यदि पागल कुत्ते ने काटा है और समय से एआरवी नहीं लगी है तो मरीज में संक्रमण बढ़ सकता है। रेबीज का संक्रमण होने के बाद मरीज को पानी से डर लगना, बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, चिंता, भ्रम की स्थिति, खाना-पानी निगलने में कठिनाई, लार निकलना, अनिद्रा, लकवा मार जाना आदि लक्षण सामने आ जाते हैं। मौसम में बदलाव के कारण कुत्ते आक्रामक हैं। लोग इनके चपेट में आने से बचें। कुत्ते भौंके तो भागे नहीं। यदि भागेंगे तो काट सकते हैं। सभी सीएचसी में पर्याप्त एआरवी उपलब्ध कराई गई है। डॉ. नवीनचंद्रा, सीएमओ रायबरेली