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VIDEO: बारिश में बह गए 30 करोड़, 200 सड़के खस्ताहाल, निर्माण कार्य पर उठ रही अंगुली

रायबरेली जिले में पिछले कई दिनों से मौसम का मिजाज बदला है। रुक-रुक कर हो रही बारिश से सड़कों की जान निकली जा रही है। हालत यह है कि एक सप्ताह में 200 सड़कें जानलेवा हो गई। इन सड़कों पर पहले से गड्ढे थे, लेकिन बारिश होने के बाद ओवरलोड वाहनों के आवागमन से सड़कों सूरत ही बदल गई। इनमें किसी सड़क का निर्माण दो साल पहले, तो किसी सड़क का निर्माण तीन साल पहले कराया गया था। समय से पहले सड़कों के बदहाल होने पर निर्माण कराने में अंगुली उठने लगी हैं। इन सड़कों से छोटे और भारी वाहन निकलते हैं। अक्सर लोग गिरकर चोटिल होते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी विद्यालय जाने वाले बच्चाें को होती है। जिले में सबसे ज्यादा पीडब्ल्यूडी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग व गन्ना परिषद, जिला पंचायत की सड़कों का मकड़जाल फैला है। एक सड़क बनने के बाद उसका नवीनीकरण पांच साल में कराया जाता है, लेकिन समय से पहले ही सड़कें ध्वस्त हो जातीं हैं। मौजूदा समय में 30 करोड़ रुपये की लागत से बनीं 200 सड़कें चलने लायक नहीं हैं। इनकी मरम्मत के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। बनने के कुछ दिन ध्वस्त हो गई सड़कें गदागंज-खीरों। गदागंज चौराहे से जलालपुर धई, चरुहार बीक, गोंडा, प्रयागपुर, नारायनपुर बन्ना गांवों को जोड़ने वाली सड़क दो साल में खस्ताहाल हो गई। अमित कुमार, सतीश कुमार, कमलेश मिश्रा, अंजनी शुक्ला, रंजीत मौर्य ने बताया कि सड़क से प्रतिदिन एक हजार लोग आते-जाते हैं। इसी तरह रायबरेली-लालगंज हाईवे से मुंशीगंज-डलमऊ राजमार्ग को जोड़ने वाली राजघाट-कठगर सड़क दो साल में बदहाल हो गई। मार्ग से प्रतिदिन 10 हजार लोग प्रतिदिन निकलते हैं। डलमऊ मार्ग से आवागमन बंद होने से इसी मार्ग से भारी वाहन इधर से निकलते हैं। इस वजह से सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गई। खीरों थाने के पास से पुरानी बाजार खीरों जाने वाली सड़क पूरी तरह गड्ढाें में तब्दील हो गई है। एक साल पहले सड़क की मरम्मत कराई गई। अब सड़क ध्वस्त हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि जल निकासी की सुविधा नहीं होने के कारण सड़क पर अक्सर जलभराव रहता है। इस वजह से सड़क बनने के कुछ दिन बाद ही ध्वस्त हो जाती है। गढ्ढा बढ़ा होने का किया जाता इंतजार सड़कों पर यदि जलभराव की समस्या है, तो सड़क ध्वस्त होनी तय है। लगातार जलभराव रहता है, तो सड़क में डाला गया डामर और तालकोल गिट्टियों को छोड़ देता है। यदि समय से गड्ढे भर दिए जाए, तो सड़क टूटने से बच सकती है, लेकिन अफसर भी इस ओर ध्यान नहीं देते। ओवरलोड वाहन से गुजरने से सड़क तहस नहस हो जाती है। जानलेवा गड्ढा होने के बाद उसे भरा जाता है। सर्वे के बाद भेजा जाएगा इस्टीमेमट बारिश के बाद सड़कों की पैच मरम्मत का काम शुरू होगा। सर्वे के बाद ही पता चल पाएगा कि कितनी सड़कें खराब है। उसी हिसाब से इस्टीमेट बनाकर भेजा जाएगा। बजट मिलते ही सड़कों की पैच मरम्मत का काम शुरू होगा। - महिपाल सिंह, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग

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