रायबरेली में मानसून की बेरुखी और बारिश न होने के कारण किसानों की चिंताएं गहराने लगी हैं। बड़ी उम्मीद और कड़ी मेहनत के साथ किसानों ने धान की रोपाई तो पूरी कर ली थी, लेकिन अब बारिश की कमी की वजह से तैयार फसल खेतों में ही सूखने की कगार पर पहुंच गई है। खेतों में पड़ी दरारें किसानों की लाचारी और उनके कड़े परिश्रम पर फिर रहे पानी की गवाही दे रही हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के अन्य साधन नहीं हैं, उनकी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। वहीं पम्पिंग सेट से सिंचाई करने वाले किसानों पर लागत का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। इधर प्रेम शंकर मिश्रा, महेंद्र श्रीवास्तव, शीतला प्रसाद मिश्रा, भानू सिंह, बबलू सिंह, ओम प्रकाश, रामसमुझ, बाबूलाल, जगदीश सहित अन्य स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने महंगे बीज, खाद और रोपाई में अपनी जमा पूंजी लगा दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार अच्छी बारिश होगी और फसल भी अच्छी होगी। लेकिन अब समय पर बारिश न होने से रोपी गई धान की फसल सूखकर पीली पड़ने लगे है। यदि अगले कुछ दिनों में तेज बारिश नहीं हुई, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी और परिवार भुखमरी के शिकार हो जाएगा।