रायबरेली में भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बिजली की मांग 410 मेगावाट पहुंच गई है। उपकेंद्रों में लगे उपकरण ओवरलोड हो गए हैं। कई उपकेंद्र ऐसे हैं, जहां एक साथ फीडर नहीं चल पा रहे हैं। ओवरलोड के चलते आए दिन तार टूट रहे हैं, तो कहीं जंफर कर रहे हैं। अब तो लोग सड़क पर उतर का विरोध जता रहे हैं। बारिश नहीं होने से किसान निजी नलकूप और राजकीय नलकूपों के सहारे सिंचाई और धान की रोपाई कर रहे हैं। एक साथ नलकूप चलने से फीडर ओवरलोड हो जाते हैं। जिले में 54 विद्युत उपकेंद्रों से करीब पांच लाख उपभोक्ताओं को बिजली मिलती है। धान की रोपाई का अंतिम समय चल रहा है। बारिश नहीं होने और नहरों में पानी नहीं आने से 22 हजार निजी नलकूप और 300 राजकीय नलकूपों पर किसान निर्भर हैं। यही वजह है कि 15 दिन पहले जहां बिजली की मांग 350 मेगावाट थी, वहीं अब मांग 410 मेगावाट पहुंच गई है। शहर में जहां बिजली की आवाजाही से लोग परेशान हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे में महज आठ से 10 घंटे बिजली मिल रही है।