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VIDEO : Raebareli: खोवा मंडी में चढ़ा महंगाई का रंग, बिक्री हो रही कम, गांवों से मंडी में आ रहा खोवा

होली का त्योहार नजदीक आ गया है लेकिन शहर की खोवा मंडी में चहलपहल बहुत कम है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार महंगाई का रंग पहले से ही चढ़ गया है, जिस कारण खोवा की खरीदारी पिछले साल की तुलना में कम है। बाजार में खोवा 250 रुपये से 280 रुपये किलो बिक रहा है। शहर में कैपरगंज स्थित आर्य समाज खोवा मंडी सबसे बड़ी मंडी है। यहां पर देदौर, सतांव, सरवा, दरीबा, उमेद का पुरवा से किसान खोवा बेंचने आते हैं। कानपुर की मंडी से अभी खोवा आना शुरू नहीं हुआ है। दुकानदारों का कहना है कि मांग कम है तो इस कारण कानपुर की खोवा मंडी से खोवा नहीं मंगाया जा रहा है। मंडी में गाय और भैंस के दूध का खोवा मिल रहा है। गाय के दूध से बने खोवा में फैट की मात्रा होती है, जिस कारण लोग इसे अधिक पसंद करते हैं। साथ ही इसका स्वाद भी अलग होता है। देशी गाय के दूध का खोवा अधिक महंगा है। इसकी कीमत 300 रुपये किलो के पार है। अमेठी तक जाता है शहर का खोवा शहर में बिकने वाला खोवा अमेठी तक जाता है। अमेठी के गौरीगंज, जायस और फुरसतगंज में शहर के खोवा की अधिक मांग है। अमेठी में पशुपालक और किसान बाजार में खोवा कम ही बेंचने के लिए आते हैं, इस कारण वहां के दुकानदार शहर की खोवा मंडी से इसे खरीदकर ले जाते हैं। शहर का खोवा बछरावां में भी जाता है। वहां पर भी आर्य समाज खोवा मंडी का खोवा अधिक पसंद किया जाता है। नकली खोवा की पहचान जरूरी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अभिहित अधिकारी डॉ सीआर प्रजापति ने बताया कि नकली खोवा का पहचान बहुत जरूरी है। लोग साधारण तरीकों का प्रयोग कर इसकी आसानी से पहचान कर सकते है। नकली खोवा की पहचान इस तरह की जा सकती है। -असली खोवा में प्राकृतिक चिकनाई होती है, जिसकी वजह से इसे रगड़ने पर यह चिकना और थोड़ा दानेदार महसूस होगा। इसके विपरीत नकली खोवा में आर्टिफिशियल चीजों की मिलावट होती है, जो इसे रबड़ जैसा बना देती है। इसमें तीखी गंध भी आती है।-खोवा में मिलावट की जांच के लिए आयोडीन टेस्ट कारगर तरीका है। खोवा में स्टार्च की मिलावट का पता लगाने के लिए गर्म पानी में खोवा का एक टुकड़ा डालें और उसमें आयोडीन की कुछ बूंदें मिलाएं। अगर मिश्रण नीला हो जाता है, तो इसका मतलब है कि खोवा में स्टार्च मिला है। -असली खोवा मुंह में डालते ही पिघल जाता है और इसमें दूध की प्राकृतिक मिठास महसूस होती है। वहीं नकली खोवा में आर्टिफिशियल चीजें मिलाई गई होती हैं जिसकी वजह से यह मुंह में चिपकता है और स्वाद में फीका होता है। -असली खोवा से बनी छोटी गोलियां मजबूत होती हैं और यह पिघलती नहीं हैं, लेकिन नकली खोवा की गोलियां बहुत जल्दी टूट जाती हैं और बनने के बाद पिघलती हैं। डॉ सीआर प्रजापति, अभिहित अधिकारी का कहना है कि खोवा मंडी में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। नकली खोवा की धरपकड़ भी हो रही है। खोवा में मिलावट रोकने के लिए आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर पूरे जिले में अभियान चलेगा।

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