रायबरेली में लालगंज कस्बा के सराफा बाजार में इन दिनों सन्नाटा बढ़ने लगा है। सोने चांदी पर बढ़ती महंगाई और सरकार की ओर से आयात शुल्क बढ़ाए जाने के फैसले ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। दीपावली तक जहां बाजार में अच्छी रौनक दिखाई देती थीवहीं अब ग्राहक जरूरत भर की खरीदारी तक सीमित हो गए हैं। छोटे दुकानदारों और कारीगरों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है। सराफा कारोबारी पावस उर्फ प्रिंशू दीक्षित ने बताया कि दीपावली के समय बाजार में लगातार ग्राहकों की भीड़ रहती थी। शादी विवाह और त्योहारों के चलते लोग खुले मन से खरीदारी करते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि दीपावली से अब तक कारोबार लगभग आधा रह गया है। महंगाई के कारण लोग भारी जेवर छोड़ हल्के और कम वजन वाले आभूषण खरीद रहे हैं। कारोबारी अजय वर्मा ने कहा कि पहले सराफा बाजार में हर मौसम में खरीदारी होती थी। अब कारोबार केवल सहालग और बड़े त्योहारों तक सीमित होकर रह गया है। जून माह में कुछ शादियां तय हैं। ऐसे में थोड़ी उम्मीद दिखाई दे रही है। इसके बाद फिर बाजार की स्थिति कमजोर पड़ सकती है। व्यवसाई कैलाश वाजपेई ने कहा कि आयात शुल्क बढ़ने से सोना और महंगा होगा। इसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। पहले ही लोग खर्चों को लेकर सावधानी बरत रहे हैं। ऐसे में जेवरों की खरीद और कम हो सकती है। बुलियन एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष रोहित सोनी ने सरकार के फैसले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर छोटे सराफा कारोबारियों पर पड़ेगा। बाजार कमजोर होने से कारीगरों को भी पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है। कई कारीगर अब दूसरे कामों की तलाश करने लगे हैं। सराफा बाजार के पुराने कारोबारी जगन्नाथ सोनी, राजेश सोनी व रजौले सोनी मानते हैं कि दीपावली की चमक अब धीरे धीरे फीकी पड़ती जा रही है। बढ़ती कीमतों ने बाजार की रौनक कम कर दी है।