मोहर्रम का चांद दिखने के साथ ही मजलिस-मातम का दौर शुरू हो गया है। चांद दिखने के बाद सबसे पहला जुलूस लाकड़ीवालान से निकाला गया। मरहूम मशकूर हसन नकवी के मकान से निकला यह मातमी जुलूस तख्तों वाले इमामबाड़े में आकर समाप्त हुआ। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने काले लिबास में शिरकत की और या हुसैन की सदाएं बुलंद की।