तीन दिवसीय सत्संग के दूसरे दिन मंगलवार को बाबा फुलसंदे वालों ने कहा कि यह मनुष्य का शरीर पाप और पुण्य का रथ है, जिस पर ज्योति स्वरूप यह आत्मा सवार है, जिस मनुष्य ने धर्म को अपना सारथी बनाया वो ही भवसागर से पार हुआ जन्म मरण से पार हुआ। शुभ कर्मों को पुण्य कर्मों को जिस व्यक्ति ने अपना हमसफर बनाया वही परमात्मा के द्वार पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि जो सतगुरु की सीख को मानते हैं उन्हें कभी दुखों की प्राप्ति नहीं होती। जो मनुष्य निराकार परमात्मा के नाम को जपता रहता है उसकी आत्मा का चांदना और प्रकाश बढ़ता चला जाता है।सत्संग सुनने के लिए दोपहर होते ही परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। इसमें मुरादाबाद के साथ ही रामपुर, अमरोहा, बिजनौर, बरेली, चंदौसी समेत कई जगहों से श्रद्धालु आए। सत्संग की शुरुआत आरती के साथ हुई। इस दौरान दोपहर दो बजे बाबा फुलसंदे वालों ने सत्संग शुरु किया।