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मिर्जापुर में भी शुरू हुआ नवजात के टेढ़े-मेढ़े पैरों का इलाज

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बुधवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत चार दिन पूर्व जन्मे एक नवजात शिशु के टेढ़े-मेढ़े पैरों का इलाज शुरू किया गया। बच्चे को जन्म के बाद ही दोनों पैरों में जन्मजात विकृति (क्लबफुट) पाई गई थी। चिकित्सक डा.अशोक यादव और फिजियोथेरेपिस्ट आनंद सिंह ने बच्चे का परीक्षण कर जरूरी चिकित्सीय प्रक्रिया शुरू की।इससे पहले कठवार और बसही गांव से भी दो बच्चों में इसी प्रकार की विकृति की पुष्टि हुई थी। इन बच्चों का भी क्रमश: उपचार जारी है।इस मौके पर जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर के नोडल अधिकारी डा. राकेश तिवारी ने बताया कि आरबीएसके के तहत जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग कर जन्मजात रोगों की पहचान की जाती है और उनका इलाज पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है। उन्होंने कहा कि क्लबफुट जैसी विकृति का समय से इलाज शुरू हो जाए तो बच्चा सामान्य तरीके से चलने फिरने योग्य हो सकता है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जांच कर ऐसे बच्चों की पहचान सुनिश्चित करें।

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