सरकार गंगा को साफ स्वच्छ बनाने के लिए सबसे बड़ा अभियान नमामि गंगे चला रही है। जिस पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन हस्तिनापुर में यह अभियान भ्रष्टाचार की भेंट चढता नजर आ रहा है। गंगे किनारों के आस पास वन विभाग, राजस्व विभाग, नमामि गंगे के अधिकारियों से मिलीभगत मोटी कमाई के चक्कर में सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ओर सरकारी भूमि पर प्लेज लगवाई जा रही हैं जिसमें मृत जानवर और मुर्गों के अवशेष और केमिकल युक्त खाद का उपयोग किया जा रहा है। जिसे करोड़ों रुपयो से हस्तिनापुर में चल रही घड़ियाल, डॉल्फिन, कछुआ परियोजना पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।