गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को धर्म न बदलने के कारण मुगलों द्वारा 27 दिसंबर 1705 को सरहिंद में जिंदा दीवार में चिनवा दिया गया था। माता गुजरी जी ने भी इसी दिन शहादत दी थी, जिसे भारत 'वीर बाल दिवस' के रूप में मनाता है। ये बलिदान सिख इतिहास के सबसे बड़े बलिदानों में से एक है। उनकी याद में बुधवार को गुरुद्वारा थापर नगर में अमृतसर के तरनतारन से आए रागी जत्थे ने शबद कीर्तन का पाठ किया।