मेरठ के मवाना क्षेत्र के अझौता गांव स्थित वाल्मीकि बस्ती के निवासी पिछले लगभग दस वर्षों से गंदे पानी की निकासी न होने की समस्या से जूझ रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि बस्ती की गलियों में हर समय गंदा पानी भरा रहता है, जिससे लोगों के मकानों की नींव कमजोर पड़ने लगी है और घरों में दरारें आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण अधिकांश परिवार अपने ही मकानों को छोड़कर गांव में किराए के मकानों में रहने के लिए मजबूर हैं। वहीं कई परिवारों ने अपने घरों के बाहर पलायन संबंधी पोस्टर भी लगा दिए हैं, ताकि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान उनकी समस्या की ओर आकर्षित हो सके। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना है कि वर्षों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के तालाब पर कब्जा कर लिया गया और उसे कृषि भूमि के रूप में दर्शाकर बेच दिया गया। इसी वजह से गंदे पानी की प्राकृतिक निकासी का रास्ता बंद हो गया, जिसके चलते बस्ती की गलियां स्थायी रूप से जलमग्न रहती हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।