मेरठ। पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के सभी दावे हवा-हवाई ही नज़र आते हैं। हर दिन एक नई समस्या उजागर होती है। मरीज़ों को पूरी सुविधा उपलब्ध कराना शायद मेडिकल कॉलेज का शगल बन गया है। तभी पिछले एक महीने से डायलिसिस यूनिट में मशीनें खराब पड़ी हैं, जिससे मरीज़ों को काफी परेशानी हो रही है। आलम यह है कि सरकारी अस्पताल में 400 रुपये में होने वाली डायलिसिस के लिए मरीज़ों के तीमारदारों को हज़ारों खर्च करने पड़ रहे हैं। डायलिसिस के लिए मेडिकल कॉलेज में कुल 7 मशीनें हैं, जिनमें से 6 मशीन नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में हैं, जबकि एक मशीन टेली आईसीयू में है। नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में रखीं 6 मशीनों में से तीन मशीन खराब हैं, जिनमें से एक मशीन हेपेटाइटिस बी और एक मशीन हेपेटाइटिस सी की है। जिनके मरीज़ बड़ी संख्या में अपना डायलिसिस कराने पहुंचते हैं। रोज़ाना करीब 12 से 15 मरीज़ डायलिसिस के लिए भेजे जाते हैं, जिनमें से सिर्फ 7 या 8 मरीज़ों की ही डायलिसिस हो पाती है, जबकि बाकी के मरीज़ों को अगली तारीख दे दी जाती है। जिन मरीज़ों की हालत ज़्यादा नाज़ुक होती है, उनको मजबूरन हज़ारों खर्च कर प्राइवेट अस्पताल में ही डायलिसिस करानी पड़ रही है। स्टाफ ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में खराब पड़ी तीन मशीनों में से दो मशीन फर्जीनेस कंपनी, जबकि एक मशीन निप्रो कंपनी की है, जिनका मेंटिनेंस नहीं होने के कारण मशीनें बंद हो गई। समर कॉलोनी, लिसाड़ी रोड के रहने वाले आस मौहम्मद काला पीलिया के मरीज़ हैं, जो इस वक्त मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती हैं। आस मौहम्मद के तीमारदार का कहना है कि उनको सांस लेने में दिक्क्त हुई। मेडिकल में डॉक्टर को दिखाया, तो डायलिसिस बता दी। लेकिन डायलिसिस में स्टाफ ने मशीन खराब होने की बात कहकर डायलिसिस करने से इंकार कर दिया। ठीक ऐसे ही कई तीमारदार ऐसे हैं, जिनका कहना है कि पिछले एक महीने से डायलिसिस की मशीनें खराब होने की वजह से उनके मरीज़ों की डायलिसिस नहीं हुई। मेडिकल कॉलेज में 400 रुपये में डायलिसिस होती थी, लेकिन अब उन्हें प्राइवेट अस्पताल में हज़ारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।