मेरठ। ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर को उसकी प्राचीन पहचान से जोड़ने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से करोड़ों रुपये खर्च किए गए। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराए गए। सड़कों के किनारे बड़े-बड़े शिलापट्ट लगवाए गए हैं, जिन पर हस्तिनापुर के प्राचीन इतिहास को दर्शाने वाले शिलालेख और तस्वीरें उकेरी गई हैं। विकास कार्यों के जरिए नगरी को आकर्षक रूप देने का प्रयास तो किया गया, लेकिन बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। बारिश होते ही कई प्रमुख मार्गों पर पानी भर जाता है। जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने वाले लोगों के साथ वाहन चालकों को भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। कई स्थानों पर सड़क किनारे जमा पानी के कारण कीचड़ की स्थिति बन गई है। स्थानीय सुदेश कुमार, दिनेश शर्मा, मुकेश शांडिल्य आदि का कहना है कि पर्यटन विभाग द्वारा नगरी को सुंदर बनाने के लिए शिलापट्ट, चित्र और अन्य सजावटी कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन मूलभूत सुविधा जल निकासी पर ध्यान नहीं दिया गया। बारिश के दौरान सड़कों पर जमा पानी विकास कार्यों की गुणवत्ता और योजना पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि पर्यटन विभाग ने विकास कार्यों की योजना बनाते समय जल निकासी की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया होता तो आज यह समस्या नहीं होती। हस्तिनापुर चेयरपर्सन सुधा खटीक ने कहा कि नगर पंचायत द्वारा करीब वर्ष पूर्व सीसी रोड का निर्माण कराया गया था पर्यटन विभाग द्वारा पानी निकासी प्रभावित की गई। नगर पंचायत की टीम से पानी निकासी की व्यवस्था कराई गई है इस मामले में पर्यटन विभाग से लिखित में जवाब मांगा जाएगा।