जिले की चारों तहसीलों पर शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस का लेखपालों ने बहिष्कार किया। आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे रहे। समाधान दिवस की समाप्ति के बाद दोपहर दो बजे मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उच्चाधिकारियों को सौंपकर धरना समाप्त किए। सभी ने लंबित मांगो को पूरा करने की मांग की। सौंपे ज्ञापन में कहा कि बीते नौ साल से लेखपाल पद की शैक्षणिक योग्यता और पदनाम परिवर्तन प्रस्तावित है, लेकिन अभी तक लागू नहीं किया गया है। प्रारंभिक वेतनमान उच्चीकरण, एसीसी विसंगति दूर करने, मृतक आश्रितों को पुरानी पेंशन सुविधा बहाल करने और राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार के अतिरिक्त पद सृजन की मांग उठाई। स्टेशनरी भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये करने, नियत यात्रा भत्ता देने की मांग की। प्रदेश के करीब 3000 लेखपाल अपने परिवारों से 500 से 1000 किलोमीटर दूर तैनात हैं और तनावपूर्ण स्थिति में कार्य करना पड़ रहा है। 23 अगस्त 2018 के शासनादेश के अनुसार अंतरमंडलीय स्थानांतरण के ऑनलाइन आवेदन परिषद द्वारा ले लिए गए, लेकिन अब तक स्थानांतरण सूची जारी नहीं की गई, जबकि अन्य विभागों के कर्मचारियों के स्थानांतरण पहले ही हो चुके हैं। जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, भूमि के टुकड़ों में विक्रय वृद्धि के कारणों से बढ़ती भूमि विवादों को देखते हुए लेखपालों के पदों में वृद्धि, कार्यालय और राजस्व सहायक और राजस्व पुलिस चौकी की व्यवस्था करने की मांग की। सदर तहसील में अध्यक्ष वैभव प्रताप सिंह के नेतृत्व में अविनाश कुमार, मनोज कुमार, संदीप वर्मा, विवेक राय, सत्येंद्र प्रकाश आदि लेखपालों ने मुख्य विकास अधिकारी प्रशांत नागर को ज्ञापन सौंपा। जबकि मुहम्मदाबाद गोहना तहसील में संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार यादव, मंत्री सर्वेश कुमार, जय प्रताप सिंह, जेपी भारती, सौरभ पांडेय ने मुख्य राजस्व अधिकारी दिनेश को ज्ञापन सौंपा। घोसी तहसील में संघ के अध्यक्ष अरविंद कुमार पांडेय के नेतृत्व में मंत्री सौरभ राय, अजय चौहान, डी आर्यन, विवेक सिंह, भरत यादव, धर्मेंद्र राय आदि लेखपालों ने जिलाधिकारी प्रविण मिश्र को ज्ञापन सौंपा। जबकि मधुबन तहसील में अध्यक्ष शरद यादव, मंत्री पटेल चौहान सहित वीरेंद्र गोड़, प्रशांत राय, नितेश मौर्य, अश्वनी यादव, आलोक सिंह ने ज्ञापन सौंपा।