नवरात्र के प्रथम दिन बृहस्पतिवार को नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों के प्रमुख दुर्गा मंदिरों में भवानी शैलपुत्री की आराधना की गई। दुर्गा के प्रथम अवतार शैलपुत्री की पूजा के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान लोगों ने व्रत रखकर मां का पूजन-अर्चन किया। नवरात्र पर्व के मद्देनजर जिले के प्रमुख मंदिरों को काफी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। साथ ही प्रमुख मंदिरों पर भारी भीड़ रही। नगर के शीतला माता धाम चैत्र नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा। सभी ने मां के दरबार में हाजिरी लगाई। मंदिर के पुजारी मनोज महाराज ने बताया कि दुर्गा के पहले अवतार शैलपुत्री को प्रकृति की देवी माना जाता है। देवी का यही स्वरूप भक्तों को पर्यावरण संतुलन की ओर प्रेरित करता है। मान्यता के अनुसार देवी का प्रथम अवतार सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक विचारों को प्रभावित करता है। मां दुर्गा के आराधना मात्र से ही मनुष्य के वैचारिक विकार दूर हो जाते हैं। शास्त्रों, पुराणों के मुताबिक हिमालय की पुत्री होने के कारण ही दुर्गा के पहले अवतार का नाम शैलपुत्री पड़ा। प्रकृति के भावों को स्पष्ट करने के लिए ही देवी के प्रथम स्वरूप के रूप में मां शैल पुत्री की आराधना की जाती है। यह भी मान्यता है कि शैलपुत्री की आराधना अकेले ही नहीं बल्कि भगवान शिव के साथ ही जानी चाहिए।