मऊ के घोसी नगर के बड़ागांव शिया मुहल्ले में गुरुवार यौम ए फातिमिया कार्यक्रम का आयोजन किया। पैगम्बर मोहम्मद साहब की पुत्री फातिमा ज़हरा की शहादत की याद में अक़ीदतमंदों ने खिराज-ए-अकीदत पेश किया। मदरसा हुसैनिया से अलम का जुलूस निकला, जो परंपरागत रास्तों से होते हुए सदर इमामबारगाह पर समाप्त हुआ। पैगंबर मोहम्मद साहब की पुत्री और इमाम हुसैन की माता फातिमा ज़हरा की याद में अलम का जुलूस बड़ागांव के मदरसा हुसैनिया से प्रारंभ होकर छोटे फाटक, नीमतल, बड़े फाटक होते हुए मातम करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सदर इमाम बारगाह पर जाकर समाप्त हुआ। इस अवसर पर नगर की सभी अंजुमनों ने फ़ातेमा मेरे ज़िगर का टुकड़ा है जिसने फ़ातेमा को दुःख पहुंचाया नौहाख्वानी कर मातम पेश किया। मौलाना मुजाहिर, मौलाना सुज़ाअत अली ने कहा कि मोहम्मद साहब की मृत्यु के तीन दिन बाद उनके घर को आग लगा दी उनके दामाद हजरत अली और उनकी बेटी को इस्लाम के विरोधियों ने चैन से रहने नहीं दिया। उनके घरों में आग लगा दी। जलता दरवाज़ा फ़ातेमा के ऊपर गिरा दिया गया।हजरत अली के गले में रस्सी का फंदा लेकर उनको घसीटा गया।।जीवन पर्यन्त इंसानियत के लिए काम किया।जनाबे फातिमा का पूरा जीवन परिवार के साथ लोगों की भलाई के लिए समर्पित कर दिया था। इस अवसर पर अलमदार हुसैन, मजहर हुसैन, इश्तेयाक हुसैन, मेहदी हसन, मौलाना मुजाहिर हुसैन, मौलाना कामिल आदि शामिल रहे।