आनंद और उल्लास में डूबे भक्त अपने आराध्य के जन्म की प्रतीक्षा में शनिवार मध्यरात्रि को घड़ी की ओर टकटकी लगाकर देखते रहे। रात्रि के 12 बजते ही भादों की अंधेरी रात में अष्टमी पर ब्रज में कन्हैया ने जन्म लिया। इस मौके पर जन्मोत्सव के लाखों श्रद्धालु साक्षी बने। भक्तों का उल्लास ऐसा था कि मानो ब्रज द्वापर युग के कालखंड को जी उठा हो। उस आनंद के क्षण से निकलने को तैयार ही नहीं। कान्हा की देहरी पर उमड़ा उल्लास और भावों का अश्रुपूरित सैलाब अवर्णनीय रहा। प्रभु के जन्म के बाद ब्रज का कण-कण धन्य हो उठा।