उत्तर प्रदेश के तराई इलाके को "बाउल ऑफ शुगर" के नाम से जाना जाता है। क्योकि यहां पर गन्ने की पैदावार ज्यादा है। इसी गन्ने और गन्ने की पैदावार करने वाले किसानों की बदौलत उत्तर प्रदेश के इस इलाके में चुनावों की गणित साधी जाती है। लेकिन अब यही गन्ना उत्तर प्रदेश के चुनावी गणित को बिगाड़ रहा है।दरअसल इस जिले में प्राइवेट चीनी मिलें किसानों को बकाया भुगतान नहीं कर रही है। इससे नाराज किसान गन्ने के तय सरकारी रेट की तुलना में तकरीबन सौ से सवा सौ रुपए कम कीमत पर कोल्हू, बेल और क्रेशर पर अपनी फसल को बेचने के लिए मजबूर है।.