रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान काला सागर से गुजर रहे कार्गो शिप पर हुए हमले में जान गंवाने वाले मर्चेंट नेवी के चीफ अफसर सागर गुप्ता का शव बुधवार को शास्त्रीनगर स्थित घर पहुंचा तो परिजन में कोहराम मच गया। पत्नी शव देख बेसुध हो गईं। परिजन ने शव को तिरंगे झंडे से न लपेट कर लाने पर नाराजगी जताई और खुद झंडा ओढ़ा कर सलामी दी। परिवार ने दो करोड़ रुपये मुआवजा, घर के एक सदस्य को नौकरी और शहीद का दर्जा देने की मांग की। वहीं, सागर के घर के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। शव का आज भैरो घाट पर अंतिम संस्कार किया जा सकता है। शास्त्रीनगर ऊंचा पार्क निवासी सागर गुप्ता मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। परिवार में मां रमादेवी, पत्नी शालू, आठ माह का बेटा कृष्णा और पांच साल की बेटी गौरी के अलावा बड़े भाई मनीष, भाभी ज्योति और दो भतीजे हैं। 18 जुलाई को यूक्रेन के ड्रोन हमले में शिप में आग लगने से सागर की मौत हो गई थी। परिजन शव घर लाने के लिए लगातार प्रयासरत थे। बुधवार सुबह 7:30 बजे रूस की राजधानी मास्को से एयर एंबुलेंस से सागर का पार्थिव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा जहां बड़े भाई दीपक व सागर के साले शोभित ने शव को रिसीव किया। एंबुलेंस के माध्यम से शाम चार बजे शव घर लेकर पहुंचे। सागर के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए पड़ोसियों, मित्रों समेत सैकड़ों की भीड़ जमा थी।