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कानपुर: कंधा कटा, दर्द असहनीय, फिर भी इमरजेंसी में अकेले संभाल रहे मरीजों की जान

11 नवंबर 2023 की वो ट्रेन दुर्घटना आज भी डॉक्टर रवीश साहू के शरीर और यादों में जिंदा है। उस हादसे में उनका एक हाथ कंधे से कट गया था। डॉक्टर हैं तो दर्द को समझते भी हैं और सहते भी हैं, लेकिन कभी-कभी वो दर्द इतना बढ़ जाता है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। सरसौल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर रवीश बताते हैं कि अचानक भीषण दर्द उठता है जो चार से छह घंटे तक लगातार रहता है। शरीर अकड़ जाता है, आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। लेकिन उसी हालत में उन्हें इमरजेंसी की जिम्मेदारी भी निभानी होती है। बुधवार को भी ऐसा ही हुआ। दर्द के बावजूद वह अकेले इमरजेंसी संभालते रहे। इस बीच एक सड़क हादसे के आए मरीजों को करीब दस मिनट इंतजार करना पड़ा। दर्द से कराहते हुए भी उन्होंने कुर्सी पर बैठकर रेफर के कागजात तैयार किए और मरीजों को काशीराम अस्पताल के लिए भेजा। डॉक्टर रवीश कहते हैं, "जो ईश्वर को मंजूर था वो तो होना ही था। लेकिन डॉक्टर होने के नाते अपनी जिम्मेदारी निभाना उससे भी जरूरी है। मरीज भगवान भरोसे हमारे पास आते हैं, उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।" सरसौल सीएचसी की इमरजेंसी में अक्सर अकेले डॉक्टर की तैनाती रहती है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कभी कोई बड़ा हादसा हो जाए या एक साथ कई मरीज आ जाएं तो व्यवस्था कैसे संभलेगी। दर्द से जूझते हुए भी ड्यूटी निभा रहे डॉक्टर रवीश की मिसाल तो है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी यह एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है।

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