केडीए बैरी अकबरपुर कछार में न्यू कानपुर सिटी योजना को ला रहा है। इसमें एक व्यक्ति ने अधिग्रहण के 2013 के नए कानून के अनुसार मुआवजे का दावा उच्च न्यायालय इलाहाबाद में किया था। इस दावे को न्यायालय ने खारिज कर दिया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की पीठ ने 9 फरवरी 2026 को कहा कि अत्यधिक विलंब किसी भी अधिग्रहण कार्यवाही को चुनौती देने के अधिकार को समाप्त कर देता है। मामले की सुनवाई के दौरान कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) की ओर से अधिवक्ता यश पाड़िया ने अदालत को बताया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 1996 में शुरू हुई थी और 2010 में पूरी हो गई थी। इसके बावजूद इस पर पहली बार 2025 में चुनौती दी गई।