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कानपुर: कानूनी मामलों में एआई का उपयोग संभल कर करें, गोष्ठी में वक्ताओं ने रखे विचार

कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से बुधवार को सिविल लाइंस स्थित सभागार में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि एआई पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। भविष्य में इसकी भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। यह दैनिक जीवन और कार्य करने की पद्धतियों में व्यापक परिवर्तन ला रहा है। हालांकि कानूनी मामलों में इसका उपयोग संभल कर करना चाहिए। मुख्य वक्ता, सीए मनु अग्रवाल ने बताया कि एआई ने काम के तरीके को बदला है। पहले तो मोबाइल में विभिन्न एआई टूल्स को इंस्टॉल करें। और उनकी कार्यप्रणाली को व्यवहारिक रूप (प्रैक्टिकल) से समझें। प्रॉम्प्ट पर कहा कि एआई से सटीक और उपयोगी परिणाम प्राप्त करने के लिए स्पष्ट और सटीक निर्देश देना चाहिए। उपयोगकर्ता द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर ही एआई अपना आउटपुट तैयार करता है। हालांकि केस लॉ पर बिना जांचे-परखे विश्वास नहीं करना चाहिए। किसी भी कानूनी संदर्भ का उपयोग करने से पूर्व उसे विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित करना अनिवार्य है। आयकर अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को समझने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग की भी जानकारी दी गई। सभापति मुकेश श्रीवास्तव ने कहा कि एआई का उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। उसके द्वारा दिए गए उत्तरों को भली-भांति पढ़कर एवं समझकर ही प्रयोग में लाना चाहिए। इस मौके पर सीए शरद सिंघल, प्रदीप कुमार द्विवेदी, मनीष श्रीवास्तव, सुनील त्रिवेदी, शरद शेखर श्रीवास्तव, शैलेंद्र सचान, शशि बाजपेयी, विमल बाजपेयी, देवेंद्र डांग, गोविंद महेश्वरी, दुर्गेश परमार्थी, हरि राम अग्रवाल, प्रशांत रस्तोगी, बसंत लाल गुप्ता, रणजीत सिंह, अंशुल श्रीवास्तव, सुनील पॉल, मनीष गुप्ता, आनंद सिंह, ज्ञान गुप्ता, राजीव गुप्ता, आनंद गुप्ता, पद्मेश बाजपेयी आदि थे।

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