कानपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी रसोई चलाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। गैस सिलेंडर की कमी और जलाऊ लकड़ी के अभाव ने लोगों को फिर पारंपरिक ईंधन की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया है। गांवों में महिलाएं और बच्चे सड़कों और मैदानों से गोबर इकट्ठा कर कंडे बनाते नजर आ रहे हैं। इन कंडों को सुखाकर रसोई में इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि किसी तरह चूल्हा जल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस की नियमित आपूर्ति नहीं होने से यह समस्या और बढ़ गई है। ऐसे में उन्हें पुराने तरीकों पर निर्भर होना पड़ रहा है।