अमौर गांव में चल रही रामकथा के पांचवें दिन, वाचिका पूर्णिमा त्रिपाठी ने कहा कि संत में इतनी ताकत होती है कि वह लंका को भी अयोध्या बना देता है, और उन्होंने उदाहरण दिया कि रावण की लात से विभीषण संत बन गए, जबकि भरत हृदय के आघात से संतत्व को प्राप्त हुए।