पुराने घाव या गंजापन की जगह पर जोंक चिपकाई गई, जहां वह खून को चूसती रहे। समय पूरा होने पर उस पर नमक का पानी डालकर जोंक को बाहर निकाला गया। इसके बाद संक्रमित क्षेत्र में हल्दी लगाई गई। इस प्रक्रिया से पुराने घाव भरने लगते हैं और गंजापन दूर होता है। इसे लीच थेरेपी या जलोका कहते हैं। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर सरसैय्या घाट स्थित नवीन सभागार में आयुर्वेद प्रदर्शनी में आयुर्वेद के विशेषज्ञों ने इस थेरेपी का लाइव प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में 10 स्टॉल लगाए गए थे, जिसमें आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी चिकित्सा शिविर, योग शिविर आदि शामिल थे।