कानपुर में हैलट के बालरोग अस्पताल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट आराधना गुप्ता ने बताया कि आत्महत्या करने से पहले हर मरीज कुछ न कुछ संकेत देता है। यदि समय रहते उन संकेतों को परिवार या आसपास के लोग समझ लें और सही मदद पहुंचाई जाए, तो बड़ी घटना को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद जरूरी है।