कानपुर देहात के भीतरगांव कस्बे में स्थित झारखंडेश्वर शिव धाम में भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती के साथ रखी गणेश जी की मूर्ति गुप्तकालीन कला का अद्वितीय उदाहरण मानी जाती है। पुरातत्वविदों के अनुसार यह मूर्ति पांचवीं सदी की प्राचीन कलाकृति का हिस्सा है। स्थानीय मान्यता है कि गणेश जी की यह मूर्ति खेत की जुताई के दौरान प्राप्त हुई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने इसे चबूतरे पर स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की। समय के साथ यहां भगवान शिव परिवार सहित विराजमान हुए और यह स्थान झारखंडेश्वर धाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया।