वित्त वर्ष 2025-26 (करनिर्धारण वर्ष 2026-27) के आयकर रिटर्न में व्यापार व पेशे से आय घोषित करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी। गैर-कर लेखा परीक्षा वाले कारोबारी 31 अगस्त, 2026 तक रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। ई-फाइलिंग पोर्टल पर आंकड़ों का मिलान व कर व्यवस्था का चयन अनिवार्य है। ये रिटर्न पुराने आयकर अधिनियम 1961 के तहत दाखिल होंगे। मर्चेंट चैंबर आफ उत्तर प्रदेश जीएसटी कमेटी के चेयरमैन कर अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 26एएस, एआईएस और टीआईएस के आंकड़ों से मिलान आवश्यक है। इसमें बैंक ब्याज, सावधि जमा, शेयर, म्यूचुअल फंड व संपत्ति के लेनदेन शामिल हैं। बेमेल होने पर करनिर्धारण कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। करदाताओं को नई व पुरानी कर व्यवस्था का आकलन कर कम करदेयता वाली व्यवस्था चुननी चाहिए। धारा 44एडी के तहत कारोबारियों को दो करोड़ रुपये तक की बिक्री पर आठ फीसदी न्यूनतम आमदनी घोषित करनी होगी। बैंक हस्तांतरण से प्राप्त भुगतान पर यह छह फीसदी होगी। धारा 44एडीए के तहत पचास लाख रुपये तक की सकल प्राप्तियों वाले पेशेवर (जैसे डॉक्टर, वकील) को 50 फीसदी आय घोषित करनी होगी। ट्रांसपोर्टरों को हल्के वाहन के लिए सात हजार पांच सौ रुपये प्रति वाहन प्रति माह और भारी माल वाहन के लिए एक हजार रुपये प्रति टन प्रति माह न्यूनतम आमदनी घोषित करनी होगी। साझेदारी फर्मों द्वारा साझेदार को दिए गए ब्याज व वेतन पर नियमानुसार टीडीएस कटौती की जाएगी। एमएसएमई पंजीकृत निर्माताओं को 15 या 45 दिन के भीतर भुगतान पर ही धारा 43बी (एच) के तहत खर्च की छूट मिलेगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 15 जुलाई, 2026 को पूंजीगत लाभ की गणना के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक 384 घोषित किया है। यह सूचकांक 01 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा, जिससे करदाताओं को पूंजीगत लाभ की करयोग्य आय कम करने में मदद मिलेगी।