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कानपुर: सरकारी प्रतिबंधों को ठेंगा, इंसानी लालच से संकट में वन्यजीव और पक्षी

सरकारी दावों और प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाते हुए बरईगढ़ झील अब इंसानी लापरवाही और स्वार्थ का शिकार बन चुकी है। पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बावजूद आसपास के गांवों के दर्जनों लोग यहां खुलेआम अवैध रूप से मछलियों का शिकार करते नजर आ रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच चिलचिलाती धूप में लोग झील में जाल डालकर मछलियां पकड़ रहे हैं और बाद में उन्हें बाहरी बाजारों में बेच रहे हैं। जबकि इस सरकारी झील में मछली पकड़ने और पक्षियों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद अवैध गतिविधियां लगातार जारी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी यह झील प्रवासी पक्षियों, नीलगाय, लोमड़ी और अन्य छोटे जंगली जानवरों का प्रमुख ठिकाना हुआ करती थी, लेकिन अब यहां सन्नाटा पसरा रहता है। इंसानी दखल और अवैध शिकार के चलते पक्षियों के झुंड अब यहां दिखाई नहीं देते।

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