आज दायित्व का पाठ न पढ़ाए जाने से ही चरित्र का हनन हो रहा है। वेदों, रामायण व अन्य धार्मिक ग्रंथों को पढ़कर ही इसे रोका जा सकता है। ये विचार बुधवार को देवकी नंदन ठाकुर महाराज ने व्यक्त किए। वह लाजपतनगर में विश्व शांति सेवा समिति के कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यदि अर्थ से शास्त्र जोड़ देंगे तो अर्थशास्त्र हो जाएगा, धर्म से जोड़ देंगे तो धर्म शास्त्र हो जाएगा। शास्त्र का सिर्फ एक उद्देश्य होता है कि ज्ञान देना। आज के शास्त्र ये सिखाते हैं कि पैसा कैसे कमाए।