नरवल तहसील परिसर में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने धरना प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेता रविप्रताप ने आरोप लगाया कि तहसील के हर कार्यालय में एक-एक "कारीगर" बैठा है, जिसे कानपुर की भाषा में दलाल कहा जाता है। उनके बिना यहां कोई काम नहीं होता। दूसरा बड़ा मुद्दा खाद की किल्लत है। समितियों में खाद के नाम पर किसानों को दिनभर लाइन में लगना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि समितियों की जांच कराई जाए और पहले वाली व्यवस्था फिर से लागू हो, जिसमें आधार कार्ड से सीधे किसान को खाद मिलती थी। बिजली को लेकर भी किसानों में गुस्सा है। रविप्रताप ने कहा कि रूमा की 33 हजार वोल्ट की लाइन में हर दूसरे दिन फाल्ट हो जाता है। ग्रामीण इलाकों में तारों के पास पेड़ों की टहनियां नहीं कटी हैं, जिससे फाल्ट बढ़ रहे हैं। दो साल पहले ग्रामीण क्षेत्र के लिए रूमा से नई लाइन डालने का प्रस्ताव बना था, लेकिन वह आज तक फाइलों में ही दफन है। सिंचाई की हालत भी बदतर है। क्षेत्र की किसी भी टेल में पानी नहीं आ रहा। नहरों में जगह-जगह कचरा भरा है, सफाई नहीं हुई है। हर साल नहर सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंचता। धरने के दौरान किसानों ने दो दिन पहले तहसील दिवस का भी जिक्र किया। रायपुर गांव के दो दर्जन से ज्यादा किसानों ने एक लेखपाल पर रुपये मांगने का आरोप लगाते हुए एक दर्जन शिकायती पत्र दिए थे। सोशल मीडिया पर लेखपाल द्वारा रुपये मांगने का ऑडियो भी वायरल हुआ, लेकिन अब तक न कार्रवाई हुई और न किसानों के पैसे वापस मिले। रविप्रताप ने चेतावनी दी कि जब तक नरवल तहसील से दलालों को नहीं हटाया जाएगा और खाद, बिजली, पानी की समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक धरना प्रदर्शन खत्म नहीं होगा।