जैन समाज के आचार्य 108 प्रसन्न सागर महाराज ने गुरुवार सुबह आनंदपुरी स्थित मंदिर में धर्मसभा को संबोधित किया। कहा कि यदि सही उम्र में बेटियों का विवाह हो जाए तो वे और उनका परिवार खुशहाल रहता है। विवाह की उम्र 19 से 21 साल मानी गई है। इसके निकल जाने पर अभिभावकों के लिए अपनी बिटिया के हिसाब से वर खोजना कठिन हो जाता है। इससे पहले उन्होंने पूजन दीप आराधना कराई। इसके बाद पियूष सागर महाराज के साथ पद विहार करते हुए जनरलगंज स्थित श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में प्रवेश किया। यहां समाज के लोगों ने उनका मंगल प्रवेश करते हुए जोरदार स्वागत किया। उन्होंने जैन धर्म में अहिंसा के महत्व के बारे में समझाया और शहरवासियों को अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। कहा कि अहिंसा ही वह मार्ग है, जिसके दम पर बड़े से बड़ा युद्ध जीता जा सकता है।