स्मार्टफोन की स्क्रीन पर अंगुलियां स्क्रॉल करने और रील्स की दुनिया में खोए युवाओं की दूरी अब किताबों से लगातार बढ़ती जा रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हाथरस स्थित राजकीय पुस्तकालय में देखने को मिल रहा है। जहां महान लेखकों और विचारकों की आठ हजार ज्ञानवर्धक पुस्तकों का विशाल संग्रह है, लेकिन उन्हें पढ़ने वालों की कमी है। वर्ष 2013 में स्थापित इस पुस्तकालय का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं और छात्रों में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक शांत व समृद्ध माहौल उपलब्ध कराना था। हालांकि, इंटरनेट और डिजिटल युग के प्रभाव के चलते स्थिति इसके ठीक विपरीत नजर आ रही है। इधर, जानकारों का मानना है कि जो गहराई और मानसिक शांति छपी हुई किताबों को पढ़ने से मिलती है, वह डिजिटल स्क्रीन पर संभव नहीं है।