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VIDEO: राष्ट्रकथा के जरिए बड़े राजनीतिक लक्ष्य की जमीन तैयार कर रहे पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह

नंदिनी नगर महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रकथा केवल धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ भी दूर तक जाते दिख रहे हैं। देवीपाटन मंडल की तीन सीटों से छह बार सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह इस मंच के जरिए एक बड़े राजनीतिक लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैं। यह आयोजन उनके लिए आगामी लोकसभा राजनीति की पृष्ठभूमि तैयार करने का माध्यम बन सकता है। हालांकि कथा में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिंहा, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी, पूर्व सांसद धनंजय सिंह के अतिरिक्त प्रदेश सरकार के मंत्री सूर्य प्रताप शाही, एके शर्मा, दिनेश सिंह सहित अन्य नेता पहुंच चुके हैँ। देवीपाटन मंडल में ‘नेताजी’ के नाम से पहचाने जाने वाले बृजभूषण शरण सिंह 2024 का लोकसभा चुनाव न लड़ पाने का मलाल कई बार सार्वजनिक रूप से जता चुके हैं। हाल ही में एक समाचार चैनल से बातचीत में उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगला चुनाव वे हर हाल में लड़ेंगे—चाहे भाजपा टिकट दे या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वे जीवित रहे तो कोई ताकत उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोक पाएगी। इससे पहले उनके सांसद पुत्र करण भूषण सिंह भी यह बयान दे चुके हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव में वे और उनके पिता दोनों भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे और एक साथ संसद पहुंचेंगे। पिता-पुत्र के इन बयानों ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राष्ट्रकथा के माध्यम से बृजभूषण सिंह लोकसभा चुनाव के लिए सामाजिक और वैचारिक आधार मजबूत कर रहे हैं। उनका फोकस अयोध्या सीट पर माना जा रहा है। यही कारण है कि कथा में अयोध्या सहित विभिन्न क्षेत्रों के मठ-मंदिरों के महंतों के साथ-साथ क्षत्रिय, यादव, गुर्जर, निषाद, पासी, कोरी, मौर्य, लोधी, राजभर समेत 52 समाजों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। साथ ही जनसहयोग के माध्यम से समाज के कमजोर और वंचित वर्ग को भी आयोजन से जोड़ने की रणनीति अपनाई गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में अयोध्या सीट सपा के पास है और भाजपा को वहां एक मजबूत चेहरे की तलाश होगी। यदि बृजभूषण सिंह को पार्टी से टिकट नहीं मिलता है तो वे निर्दल चुनाव लड़कर जीत दर्ज कर सकते हैं और बाद में वैचारिक धरातल वाली पार्टी में वापसी कर सकते हैं। इससे भाजपा को भी सीट का लाभ मिल सकता है। बृजभूषण सिंह के लिए अयोध्या सीट इसलिए भी अनुकूल मानी जाती है क्योंकि उन्होंने छात्र राजनीति की शुरुआत साकेत कॉलेज अयोध्या से की थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े होने के कारण संत-महंतों में उनकी गहरी पैठ रही है। हालांकि, सपा नेतृत्व से उनके मधुर संबंध भविष्य के निर्णय को लेकर कुछ असमंजस भी पैदा कर सकते हैं।

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