सूर्यदेव की पूजा, प्रकृति उपासना और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा में व्रतियों ने अपने पुत्र व परिवार के स्वास्थ्य, संपन्नता और दीर्घायु के लिए 36 घंटे का निराजल व्रत रखा। छठ पर्व पर सोमवार को छठी मैया का गीत गुनगुनाते हुए श्रद्धालु टोकरी सिर पर रखकर पोखरा व घाट पर पहुंचे। पहले से बनी वेदी पर पूजन-अर्चन किया। जल और गाय के दूध से अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। घाटों पर मेले जैसा माहौल रहा। परिजन ढोल नगाड़े बजाते रहे तथा पटाखा फोड़ते रहे।