राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में चार लाख परिवारों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारत सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लक्ष्य जारी होने के बाद स्वतः रोजगार उपायुक्त कार्यालय ने स्वयं सहायता समूहों के गठन की कवायद तेज कर दी है। जिले में इस वर्ष 24,754 नए स्वयं सहायता समूह गठित किए जाएंगे। जिले के सभी 16 विकास खंडों में वर्तमान समय में 64 संकुल संघ, 970 ग्राम संगठन और 16,380 से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इनके माध्यम से एक लाख से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से जोड़ा जा चुका है। महिलाएं समूहों के जरिए न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद स्थानीय बाजारों के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं। ‘अरगा’ ब्रांड के उत्पादों को अच्छी पहचान मिल रही है। स्वतः रोजगार उपायुक्त जेएन राव ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष में समूह सखी और ई-बुक कीपर के माध्यम से विशेष अभियान चलाकर महिलाओं को समूहों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है।