सरकार जहां पेट्रोल-डीजल की बचत और यातायात व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आम लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील कर रही है, वहीं जनप्रतिनिधि खुद रोडवेज बसों से दूरी बनाए हुए हैं। आलम यह है कि गोंडा डिपो की बसों में सांसद और विधायकों के लिए आरक्षित सीटें वर्षों से खाली पड़ी हैं। भारतीय परिवहन मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण भानु तिवारी ने बताया कि वर्ष 2009 के बाद से गोंडा डिपो की किसी बस में सांसद या विधायक के यात्रा करने की जानकारी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि पहले जनप्रतिनिधि आम लोगों के बीच रहकर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब यह परंपरा लगभग खत्म हो गई है। उन्होंने बताया कि काफी समय पहले सुल्तानपुर जिले के जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामसेवक कई बार रोडवेज बसों से सफर कर चुके हैं। गोंडा डिपो के चालक राकेश गोस्वामी ने बताया कि वह करीब एक वर्ष से बस चला रहे हैं, लेकिन इस दौरान किसी सांसद या विधायक को बस में सफर करते नहीं देखा। वहीं बहराइच डिपो के चालक सुनील कुमार गिरी ने बताया कि करीब पांच-छह वर्ष पहले एक विधायक ने बस से यात्रा की थी। उन्होंने बताया कि एक बार बाराबंकी के विधायक शरद अवस्थी ने रोडवेज बस में सफर किया था। रोडवेज कर्मियों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि समय-समय पर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें तो इससे आम लोगों में भी बस सेवा के प्रति विश्वास बढ़ेगा और सुविधाओं में सुधार की जरूरतों को वे करीब से समझ सकेंगे।