यूपी के गोंडा में बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने की सरकारी मुहिम कमजोर पड़ गई है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पिछले तीन महीने से पोषाहार वितरण ठप है। कुपोषण का असर बच्चों के वजन और कद पर पड़ रहा है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से 3,02,784 बच्चों का वजन व कद मापा गया, जिससे जिले के 20 हजार 605 बच्चों का वजन व कद औसत ने कम पाए गए। जिन्हें कुपोषित व अति कुपोषित की श्रेणी में रखा गया है। मेडिकल कॉलेज स्थिति पोषण पुनर्वास केंद्र में छपिया के धर्मदासपुर निवासी शिवांश की उम्र दो वर्ष है। लेकिन इनका वजन 7.5 किलोग्राम व लंबाई 79 सेमी है। जबकि दो वर्ष के बच्चों का औसत लंबाई 85 सेमी तथा वजन 11 से 13 किलोग्राम का होना चाहिए। बच्चे में काफी कमजोरी भी है। जिसे बुधवार को भर्ती कराया गया। डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि कुपोषण के चलती बच्चों का विकास नहीं हो पाता है। जिससे उनका वजन, कद औसत से कम बढ़ता। गर्भावस्था में मां व जन्म के बाद बच्चे को पोषणयुक्त आहार मिलना चाहिए