सीतापुर के सहायक अध्यापक एक पैर से दिव्यांग थे। गरीब परिवार का भला करने के लिए उन्होंने लक्ष्मी कुशवाहा से शादी की थी। उन्होंने सोचा था कि मुझे सहारा भी मिल जाएगा और एक परिवार का भला भी। शादी के बाद उनके सारे सपने टूट गए। वे जिसे अपनी हमसफर बनाए वही उनके जिंदगी का रोड़ा बन गई।